Tuesday, December 6, 2016

दिव्‍य लोक की खुली है खिड़की 


दिव्‍य लोक की खुली है खिड़की 
बह रही दिव्‍य हवायें 
आइये अपने अन्‍तस को 
दिव्‍यता से सहलायें । 

दिख रहे इस खिड़की से हमको 
दिव्‍यलोक के भव्‍य नजारें
सीधे-साधे आदि गुरूओं के 
सलोने चेहरे प्‍यारे ।

इस खिड़की से ही भेजे जाते 
हमारे मालिक को संदेश 
हमने भी कुछ पढ़ लिये, देखे
'व्हिस्‍पर्स़़...... ' के भेष ।

छोटी सी इस खिड़की के पीछे 
छिपा दिव्‍य खजाना
प्रिय चारीजी ने ढंग से 
सर्वप्रथम इसे पहचाना।

राम नाम की लूट मची है
इस खिड़की से लूट लो
शर्त यह है कि प्रिय मालिक से पहले 
सम्‍बंध अखण्‍ड अटूूट हो। 

सच्‍चा साधक ही कर पायेगा 
इस खिड़की का सदुपयोग 
समर्पित अभ्‍यासी ही कर पायेगा
उस अनंंत से योग।

                                            - ओम गोम्‍बर