प्रेम में पिघल
जाएं हम
प्रेम में पिघल जाएं हम
आंसू न रोक पाएं हम
दिव्य मिलन की प्रतीक्षा में
धीरज न खो पाएं हम । (1)
प्रेम की शक्ति है प्रबल
पहुंचाएं न किसी को हानि
उनके स्मरण का दीप जलाकर
ध्यान में रम जाएं हम । (2)
प्रेम सारे भेद मिटाता
प्रेम एकाकार कराता
प्रेम परमानंद का पर्याय
प्रेम में डूब जाएं हम । (3)
प्रेम-बूटी ह्रदय में बो लो
प्रेम की अनुभूति कर लो
प्रेम-पुराण, प्रेम-श्रुति पढ. लो
प्रेमाश्रम बन जाएं हम। (4)
प्रेम नहीं आडम्बर चीज
प्रेम नहीं शोर दिखावा
मौन में प्रेम का अमृत पी लें
मालिक जैसे हो जाएं हम । (5)
बूंद अलग क्यों सागर से
उसमें लय हो जाएं हम
काट के सारे कर्म-बन्धन
प्रेममय हो जाएं हम । (6)
प्रेम में भीग जाएं हम
ह्रदय-पटल चमकाएं हम
लेकर मालिक की मदद
मालिक ही बन जाएं हम । (7)
प्रेम में पिघल जाएं हम . . .
-- ओम गोम्बर