Sunday, March 26, 2017

                      
प्रेम में पिघल जाएं हम
प्रेम में पिघल जाएं हम
आंसू न रोक पाएं हम
दिव्‍य मिलन की प्रतीक्षा में
धीरज न खो पाएं हम ।            (1)
प्रेम की शक्ति है प्रबल
पहुंचाएं न किसी को हानि
उनके स्‍मरण का दीप जलाकर
ध्‍यान में रम जाएं हम ।           (2)

प्रेम सारे भेद मिटाता
प्रेम एकाकार कराता
प्रेम परमानंद का पर्याय
प्रेम में डूब जाएं हम ।             (3)

प्रेम-बूटी ह्रदय में बो लो
प्रेम की अनुभूति कर लो
प्रेम-पुराण, प्रेम-श्रुति पढ. लो
प्रेमाश्रम बन जाएं हम।             (4)

प्रेम नहीं आडम्‍बर चीज
प्रेम नहीं शोर दिखावा
मौन में प्रेम का अमृत पी लें
मालिक जैसे हो जाएं हम ।         (5)

बूंद अलग क्‍यों सागर से  
उसमें लय हो जाएं हम
काट के सारे कर्म-बन्‍धन
प्रेममय हो जाएं हम ।             (6)

प्रेम में भीग जाएं हम
ह्रदय-पटल चमकाएं हम
लेकर मालिक की मदद
मालिक ही बन जाएं हम ।          (7)

प्रेम में पिघल जाएं हम . . .
      
             -- ओम गोम्‍बर 

1 comment:

  1. The poem is a real love-story of Master and his disciple.

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